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बुधवार, 3 नवम्बर 2010

मनायें उत्सवों का स्नेह सम्मेलन

दीपोत्सव याने आनन्द का उत्सव, उल्लास का उत्सव, प्रसन्नता का उत्सव, प्रकाश का उत्सव! दीपोत्सव सिर्फ एक उत्सव ही नहीं है, बल्कि उत्सवों का स्नेह सम्मेलन भी है. धनतेरस, काल चतुर्दशी, दिपावली, नया साल और भैय्यादूज---ये पाँच उत्सव पाँच विभिन्न सांस्कृतिक विचारधाराएँ लेकर इस उत्सव में सम्मिलित हुए हैं. जागृत समझदारी से यदि ये उत्सव मनायें जाएं तो मानव को समग्र जीवन का सुस्पष्ट दर्शन प्राप्त हो जाए.

धनतेरस:- धनतेरस अर्थात लक्ष्मीपूजन का दिन. भारतीय संस्कृति नें लक्ष्मी को तुच्छ या त्याज्य मानने की गलती कभी नहीं की है, उसने लक्ष्मी को माँ मानकर उसे पूज्य माना है. वैदिक ऋषि नें तो लक्ष्मी को संबोधन करके श्रीसूक्त गाया है:-

ॐ महालक्ष्मी च विद्महे विष्णुपत्नि च धीमहि
तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात !!

(महालक्ष्मी को मैं जानता हूँ! (जिस) विष्णु पत्नि का ध्यान करता हूँ, वह लक्ष्मी हमारे मन, बुद्धि को प्रेरणा दे!)

कहते हैं कि लक्ष्मी चंचल है. लेकिन सच ये है कि लक्ष्मी चंचल नहीं अपितु लक्ष्मीवान मानव की मनोवृति चंचल होती है. वित्त एक शक्ति है, जिसके सहारे इन्सान देवता भी बन सकता है और दानव भी. लक्ष्मी को केवल भोगप्राप्ति का साधन मानने वाला मानव पतन के गहरे गर्त में समा जाता है, जब कि लक्ष्मी का मातृवत पूजन करके उसे प्रभु का प्रसाद मानने वाला मानव खुद तो पवित्र होता ही है, पर सृष्टि को भी पवन करता है. विकृत मार्ग पर व्यय की हुई अलक्ष्मी होती है, स्वार्थ में व्यय की हुई लक्ष्मी वित्त कहलाती है, परार्थे व्यय की हुई लक्ष्मी और प्रभुकार्यार्थ जो खर्ची जाती है---वह है महालक्ष्मी. महालक्ष्मी हाथी पर बैठकर सजधज के आती है. हाथी औदार्य का प्रतीक है. सांस्कृतिक कार्य में उदार हाथ से लक्ष्मी को खर्चने वाले के पास लक्ष्मी पीढियों तक रहती है. लक्ष्मी एक महान शक्ति होने के अच्छे लोगों के हाथ में ही रहनी चाहिए, जिससे उसका सुयोग्य उपयोग हो.

काल-चतुर्दशी:-जो कि नरक चतुर्दशी भी कहलाती है, इस दिन महाकाली का पूजन होता है. परपीडा में व्यय की जाए उसे अशक्ति, स्वार्थ के लिए व्यय की जाए वह शक्ति, रक्षणार्थ व्यय की जाए वह काली और प्रभुकार्यार्थ व्यय की जाए, वह महाकाली है. अपने स्वार्थ के लिए शक्ति खर्चने वाला दुर्योधन, दूसरों के चरणों पर शक्ति रखने वाला कर्ण और प्रभुकार्य में शक्ति का हवन करने वाला अर्जुन--महाभारत में, इन तीनों पात्रों का उत्कृष्ट चित्रण करके महर्षि वेदव्यास ने हमें सुस्पष्ट जीवन-दर्शन दिया है.

दीपावली:-- याने वैश्यों का हिसाब-बही खाते के पूजन का दिन. समग्र वर्ष का लेखाजोखा निकालने का दिन. इस दिन इन्सान को जीवन का भी लेखाजोखा निकालना चाहिए. राग-द्वेष, बैर-विरोध, ईर्ष्या-मत्सर तथा जीवन से कटुता दूर कर नये वर्ष के दिन में प्रेम, श्रद्धा और उत्साह बढाने का ध्यान रखना चाहिए.


दिल में जो दीपक प्रकटे तो रोज दीवाली भ्रात;
वर्ना,शुभबुद्धि वर्जित जीवन में होली है दिनरात;
कहूँ मैं अजब अनोखी बात !

दिल में यदि अन्धेरा हो तो बाहर प्रकटे हुए हजारों दीप निरर्थक बन जाते हैं. दीपक ज्ञान का प्रतीक है---दिल में दीपक जलाना अर्थात निश्चित समझदारी से दिपावली का उत्सव मनाना. धनतेरस के दिन वित्त को जीवन सार्थक करने की शक्ति मानकर महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. काल-चतुर्दशी के दिन जीवन में नरक निर्माण करने वाले आलस, प्रमाद, अस्वच्छता, अनिष्ठता वगैरह नरकासुरों को मारना चाहिए. दिपावली के दिन "तमसो मा ज्योतिर्मय!" मन्त्र की साधना करते-करते जीवनपथ प्रकाशित करना चाहिए, जीवन के बही-खाते का लेखाजोखा निकालते समय जमा में ईशकृपा रहे, इसलिए प्रभुकार्य के प्रकाश से जीवन को भर देना चाहिए.

प्रभुकार्य दे पालकी वर्ना उठे जनाजा भ्रात'
एक प्रकाश दिवाली का है, दूजी होली की आग...
कहूँ मैं अजब अनोखी बात!

पुराने सभी वैरभाव भूलकर शत्रु का शुभचिंतन करना चाहिए. नया वर्ष, नई ऋतु आरम्भ याने शुभ संकल्प का दिन. भैय्यादूज के दिन स्त्री की ओर देखने की भद्रदृष्टि प्रप्त करनी चाहिए और भाई के स्नेह से समस्त स्त्री जाति को बहन के रूप में स्वीकार करना चाहिए. ऎसी सुन्दर समझ देने वाला ज्ञानदीपक यदि दिल में प्रकट हो तो हमारा जीवन सदैव दीपोत्सव महोत्सव बना रहेगा...

"ध्येय महान धरो जीवन में, वीर बनो कहती है दीवाली;
भेख धरो संस्कृति कारण, दीक्षित होके मनाओ दीवाली "

8 टिप्पणियाँ:

karishna ने कहा…

सार्थक एवं सामयिक आलेख पंडित जी/
प्रणाम/

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर लेख हमेशा की तरह से.धन्यवाद

ali ने कहा…

शुभकामनायें !

बेनामी ने कहा…

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अल्पना वर्मा ने कहा…

आप का ये कहना अति उत्तम लगा..''दिपावली के दिन "तमसो मा ज्योतिर्मय!" मन्त्र की साधना करते-करते जीवनपथ प्रकाशित करना चाहिए, जीवन के बही-खाते का लेखाजोखा निकालते समय जमा में ईशकृपा रहे, इसलिए प्रभुकार्य के प्रकाश से जीवन को भर देना चाहिए.''
ऐसा हो जाये तो इंसान हर दिन ही रोशन रहेगा.
दीपोत्सव पर इतने सुन्दर विचार पढ़े.आभार.
इस दीपोत्सव महोत्सव के शुभ अवसर पर आप को भी शुभकामनायें.

अनुपमा पाठक ने कहा…

sundar aalekh!
regards,

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

दीपावली की शुभकामनायें!

अशोक बजाज ने कहा…

सुन्दर पोस्ट .बधाई !

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