हमारा देश एक उत्सव प्रिय राष्ट्र है और इसलिए प्रत्येक ऋतु में कोई न कोई उत्सव मनाने की परम्परा चली आ रही है, किन्तु वसन्त में तो उत्सवों का चरमोत्कर्ष मिलता है। होली का उत्सव हमारी तामसिक प्रवृ्तियों के मुखर होने हेतु नियत किया गया है। इस दिन हमारी मर्यादित प्रकृ्ति भी उन्मुक्त हो जाती है। आमोद-प्रमोद निर्बन्ध हो जाते हैं तथा संयम और शिष्टाचार की मर्यादा का उल्लंघन भी क्षम्य समझा जाता है। उत्सव की इस सम्मोहिनी को हमारे मन्त्र दृ्ष्टा ऋषियों नें समझा था। तभी तो उन्होने कहा है-----
यतपुरूषेण हविषा देया यज्ञमतन्वत ।
वसन्तोस्यासीदाज्यं ग्राष्म इध्म: शरद्ववि: ।।
आपको अपने जीवन में अभ्युदय और निःश्रेयस, दोनों की ही प्राप्ति हो। रंगोत्सव के इस पावन पर्व पर मेरी आप सबके लिए यही हार्दिक शुभकामनाएं हैं।




9 टिप्पणियाँ:
इस बार रंग लगाना तो.. ऐसा रंग लगाना.. के ताउम्र ना छूटे..
ना हिन्दू पहिचाना जाये ना मुसलमाँ.. ऐसा रंग लगाना..
लहू का रंग तो अन्दर ही रह जाता है.. जब तक पहचाना जाये सड़कों पे बह जाता है..
कोई बाहर का पक्का रंग लगाना..
के बस इंसां पहचाना जाये.. ना हिन्दू पहचाना जाये..
ना मुसलमाँ पहचाना जाये.. बस इंसां पहचाना जाये..
इस बार.. ऐसा रंग लगाना...
होली की उतनी शुभ कामनाएं जितनी मैंने और आपने मिलके भी ना बांटी हों...
शुभकामनायें !
आपको भी ढेरों मंगलकामनाएं
आपको भी सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाऎँ!!!!
बहुत आभार पंडित जी.
ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
खुशी की हो बौछार,चलो हम होली खेलें.
आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.
-समीर लाल ’समीर’
बहुत आभार आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.
आप ने बिलकुल सही लिखा, होली की आप सब को बहुत बहुत बधाई
रंगोत्सव के विषय में इतनी अच्छी जानकारी मिली.
सच भारत उत्सव प्रिय देश है..poore varsh कुछ न कुछ पर्व त्यौहार रौनक मेला लगा ही रहता है.
abhaar.
बहुत बढ़िया लगा ! उम्मीद है आपने अपने परिवार के साथ होली में बहुत आनंद किये!
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